आयुर्वेद मुख्यतः पोषण, जीवनशैली में बदलाव और प्राकृतिक उपचारों का उपयोग करता है। इनका उपयोग संतुलन बनाए रखने और स्वास्थ्य की ओर लौटने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद समग्र स्वास्थ्य पर केंद्रित है। लेकिन यह कुछ रोगों के लिए विशिष्ट उपचारों का उपयोग कर सकता है।
इसलिए, आयुर्वेदिक उपचार का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि त्रिदोषों का संतुलन बनाए रखा जाए। आयुर्वेद में, शरीर, मन और चेतना संतुलन बनाए रखने में एक साथ काम करते हैं। शरीर, मन और चेतना की असंतुलित अवस्था (vikruti) विकृति कहा जाता है।
जलन और सूजन में भी आयुर्वेदिक दवाइयां मददगार है।
शरीर का शुद्धिकरण करने में सहायक होती है।
कैंसर, निम्न रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल सहित काफी क्रिटिकल बीमारियों से भी आयुर्वेद व्यक्ति का बचाव करती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां काफी सहायक मानी जाती है।